मुंगेर। बिहार के मुंगेर जिले से रिश्तों और इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक बेहद सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़के पर अपने ही पड़ोस में रहने वाली मात्र 5 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने का संगीन आरोप लगा है। इस घिनौनी घटना के बाद पूरे इलाके में भारी आक्रोश और तनाव का माहौल है। हालांकि, मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए मुंगेर पुलिस ने बेजोड़ तत्परता दिखाई और महज 7 घंटे के भीतर आरोपी को दबोच कर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।
जानकारी के अनुसार, यह हृदयविदारक वारदात रविवार की है। घटना के वक्त मासूम बच्ची घर पर अपनी बुजुर्ग दादी के साथ अकेली थी, जबकि उसकी मां किसी जरूरी काम से घर से बाहर गई हुई थी। घर में कोई सक्षम सदस्य न देखकर रिश्ते में पड़ोसी लगने वाला 15 वर्षीय नाबालिग आरोपी वहां आ धमका। उसने पहले बच्ची की बुजुर्ग दादी को अपनी बातों में उलझाया और फिर बच्ची को बाहर घुमाने के बहाने बहला-फुसलाकर अपने साथ सुनसान जगह पर ले गया। घर से कुछ दूरी पर ले जाकर आरोपी ने इस अमानवीय और घिनौनी वारदात को अंजाम दिया और तड़पती हुई मासूम को वहीं छोड़कर मौके से फरार हो गया। कुछ समय बाद जब पीड़िता की मां अपना काम खत्म कर घर लौटी, तो उसने बच्ची को बदहवास और रोती हुई हालत में देखा। डरी-सहमी मासूम ने हिम्मत जुटाकर रोते हुए अपनी मां को आपबीती सुनाई। बच्ची की बात सुनकर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने बिना कोई समय गंवाए तुरंत स्थानीय थाने पहुंचकर पुलिस को मामले की लिखित सूचना दी। पुलिस अधीक्षक के कड़े रुख के बाद पुलिस की एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने आरोपी को पकड़ने के लिए उसके सभी संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू कर दी। पुलिस के चौतरफा दबाव के कारण घटना के महज 7 घंटे के भीतर ही आरोपी नाबालिग को धर दबोचा गया। यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। पुलिस ने पीड़िता की मां के आवेदन पर तुरंत प्राथमिकी दर्ज कर ली थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विशेष टीम को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को 7 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया गया और जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के समक्ष पेश कर बाल सुधार गृह (रिमांड होम) भेज दिया गया है। मुंगेर की इस घटना ने समाज को एक बार फिर गहरे आत्ममंथन के लिए मजबूर कर दिया है। इस वारदात से यह साफ हो गया है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर अब परिवारों को पहले से कहीं अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। आज के दौर में अपनों और परिचितों पर भी आंख मूंदकर भरोसा करने का नतीजा अक्सर भयावह रूप में सामने आ रहा है। बुद्धिजीवियों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित न्याय और कठोर कानूनी कार्रवाई ही समाज में एक कड़ा संदेश दे सकती है।

