बिहार के बेगूसराय जिले के चकिया थाना क्षेत्र से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक ऐसी खौफनाक वारदात सामने आई है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। एक विवाहिता के साथ न केवल सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) किया गया, बल्कि उसके बाद अपराधियों ने क्रूरता और हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। वारदात के सात दिन बाद जब पीड़िता की चिकित्सकीय जांच दोबारा की गई, तो उसके आंतरिक अंगों से कंकड़, लकड़ी के टुकड़े और गोली (बुलेट) का अवशेष बरामद हुआ। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद पूरे राज्य में हड़कंप मच गया है और लोग दोषियों को तत्काल फांसी देने की मांग कर रहे हैं। फिलहाल पीड़िता गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती है और असहनीय दर्द से कराह रही है।
घटना बीते 11 जून की रात की बताई जा रही है। पीड़िता द्वारा दर्ज कराए गए आधिकारिक बयान के अनुसार, पांच अपराधियों ने योजनाबद्ध तरीके से उसके पति को हथियारों के बल पर बंधक बना लिया। इसके बाद आरोपी महिला को जबरन खींचकर एक सुनसान स्थान पर ले गए और बारी-बारी से उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। महिला ने जब इस घिनौने कृत्य का विरोध करने का प्रयास किया, तो दरिंदों ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की। बर्बरता यहीं नहीं रुकी; बेहोशी की हालत में पीड़िता के पूरे शरीर पर ब्लेड से कई वार किए गए और उसके आंतरिक अंगों के साथ गंभीर खिलवाड़ कर उसे तड़पने के लिए छोड़ दिया गया। इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन की संवेदनशीलता को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने पीड़िता को इलाज के लिए बेगूसराय सदर अस्पताल में भर्ती कराया था। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि डॉक्टरों ने गहन जांच किए बिना ही अगले दिन उसे अस्पताल से डिस्चार्ज (छुट्टी) कर दिया। घर पहुंचने के बाद जब महिला का दर्द असहनीय हो गया और उसकी ब्लीडिंग नहीं रुकी, तब परिजनों ने उसे दोबारा अस्पताल में भर्ती कराया। इसके बाद हुई गहन जांच और सर्जरी में जो सच सामने आया, उसने डॉक्टरों के भी होश उड़ा दिए। प्रथम दृष्टया अस्पताल प्रबंधन की इस भारी लापरवाही पर भी अब सवाल उठने लगे हैं। पीड़िता ने पुलिस को दिए अपने बयान में एक और चौंकाने वाला खुलासा किया है। उसने बताया कि कुछ महीने पहले भी इन्हीं दबंगों और आरोपियों ने उस पर जानलेवा हमला किया था और दुष्कर्म का प्रयास किया था। उस समय परिजनों ने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और कोई प्रभावी कानूनी कार्रवाई नहीं की। पीड़िता का आरोप है कि पुलिस की इसी ढुलमुल कार्यशैली के कारण आरोपियों का मनोबल सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दे डाला। मामले के तूल पकड़ने और चौतरफा दबाव के बाद बेगूसराय पुलिस मुख्यालय पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक और वैज्ञानिक (साइंटिफिक) तरीके से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। फरार चल रहे सभी पांचों नामजद आरोपियों की धरपकड़ के लिए एक विशेष जांच दल का गठन कर संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस महानिदेशक कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि यदि पूर्व में दी गई शिकायतों या इस घटना की शुरुआती जांच में किसी भी पुलिस पदाधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है, तो उनके खिलाफ सेवा से बर्खास्तगी तक की कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, पीड़िता को बेहतर इलाज के लिए उच्च संस्थान में रेफर करने की तैयारी चल रही है और पूरे इलाके में तनाव और आक्रोश को देखते हुए एहतियातन पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

