फेसबुक लाइव और सरेंडर के दावे से उलझा भरत तिवारी मामला: चार पुलिसकर्मी सस्पेंड, उच्च स्तरीय जांच शुरू

Blog
 Image

बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक रूप ले लिया है। इस कथित मुठभेड़ को लेकर प्रदेश की राजनीति में सियासी भूचाल आ गया है। सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने खुद अपनी ही पुलिस की कार्यप्रणाली पर बेहद गंभीर सवाल खड़े कर दिए। बक्सर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बात करते हुए शिक्षा मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह एक बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है और अगर एनकाउंटर इतना ही जरूरी था, तो पुलिस को 'हाफ एनकाउंटर' (पैर में गोली मारना) करना चाहिए था, सीधे जान नहीं लेनी चाहिए थी। मंत्री के इस बयान के बाद महकमे में खलबली मच गई है। इस पूरे विवाद की जड़ में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ एक वीडियो है। बुधवार को एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें युवक भरत भूषण तिवारी पुलिस के सामने हाथ में पिस्टल ताने खड़ा दिखाई दे रहा था। पुलिस का दावा है कि युवक ने खुद इस वीडियो को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था।

वहीं, दूसरी ओर फेसबुक लाइव का एक और पहलू सामने आया है, जिसमें युवक कथित तौर पर यह कहता नजर आ रहा था कि वह पुलिस के सामने सरेंडर (आत्मसमर्पण) कर रहा है। इसी सरेंडर के दावे और उसके बाद पुलिस द्वारा चलाई गई गोली के चलते अब पूरी घटना पर उंगलियां उठने लगी हैं। अपनी ही सरकार की पुलिस को कटघरे में खड़ा करते हुए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि उस बच्चे ने सोशल मीडिया पर जो व्यवहार दिखाया, वह निश्चित रूप से अच्छा या स्वीकार्य नहीं था। लेकिन पुलिस को कोई भी बड़ा कदम उठाने से पहले उसके आपराधिक इतिहास (क्रिमिनल बैकग्राउंड) का पता लगाना चाहिए था। कहा कि बिहार सरकार ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। कानून को हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं है। इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए 4 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया है। मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं और जो भी अधिकारी या कर्मी दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इधर, मामले के तूल पकड़ने के बाद भोजपुर पुलिस ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि बुधवार सुबह लगभग ९ बजे पुलिस टीम ने भरत तिवारी को आत्मसमर्पण के लिए घेरा था। लेकिन आरोपी ने सरेंडर करने के बजाय पुलिस टीम पर सीधे फायरिंग झोंक दी। पुलिस के अनुसार, आत्मरक्षा (सेल्फ डिफेंस) में जवाबी कार्रवाई करते हुए पुलिस को भी गोली चलानी पड़ी। गोली लगने से घायल युवक को तुरंत इलाज के लिए आरा सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने पटना पीएमसीएच रेफर कर दिया। हालांकि, इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद गुरुवार सुबह जब भरत भूषण तिवारी का शव उसके पैतृक गांव शाहपुर पहुंचा, तो ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों ने शव को बीच सड़क पर रखकर आरा-बक्सर मुख्य मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ उग्र नारेबाजी की। देखते ही देखते प्रदर्शनकारी बेकाबू हो गए और उन्होंने पुलिस टीम पर पथराव शुरू कर दिया। स्थिति को नियंत्रण से बाहर होता देख पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा, जिससे इलाके में काफी देर तक अफरातफरी मची रही। ग्रामीणों का साफ आरोप है कि युवक का पहले से कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था और वह सरेंडर कर रहा था, इसके बावजूद पुलिस ने जानबूझकर उसे अपनी गोली का निशाना बनाया। फिलहाल पूरे इलाके में तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात है।