'डायल 112' ने बदला बिहार पुलिस का चेहरा; 3 साल में 56 लाख से अधिक लोगों तक पहुंचाई आपातकालीन सहायता, राष्ट्रीय स्तर पर बनाया दबदबा

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पटना। बिहार में कानून-व्यवस्था और आपातकालीन सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की दिशा में 'डायल 112' सेवा एक बड़ा गेमचेंजर साबित हुई है। राज्य में अपराध, सड़क दुर्घटनाओं, घरेलू हिंसा और स्थानीय विवादों पर लगाम लगाने के लिए शुरू की गई इस एकीकृत आपातकालीन सेवा ने सफलता के नए आयाम स्थापित किए हैं। बिहार पुलिस मुख्यालय के आपातकालीन प्रबंधन विंग के एडीजी अमित लोढ़ा ने बताया कि वर्तमान में बिहार पुलिस का औसतन रिस्पांस टाइम घटकर लगभग 10 से 11 मिनट हो गया है, जो राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष प्रदर्शनों में से एक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इच्छा के अनुरूप अब इस रिस्पांस टाइम को और घटाकर मात्र 7 मिनट के आसपास लाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए संसाधनों को गांव-गांव तक मजबूत किया जा रहा है। जुलाई 2022 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा शुरू की गई इस एकीकृत सेवा ने पिछले तीन वर्षों (जुलाई 2022 से मई 2026 तक) में राज्य की कानून-व्यवस्था का चेहरा पूरी तरह बदल दिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि के दौरान 56 लाख से अधिक लोगों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराई गई है। रोजाना पटना स्थित अत्याधुनिक कंट्रोल रूम में 6,000 से 7,000 फोन कॉल अटेंड किए जा रहे हैं।

बिहार सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए एक पूरी तरह से समर्पित और हाईटेक कंट्रोल रूम तैयार किया है, जो 24 घंटे सातों दिन काम करता है। इस कंट्रोल रूम की कमान मुख्य रूप से महिला पुलिस पदाधिकारियों के हाथों में है, जिन्हें एडीजी, डीआईजी और पुलिस अधीक्षक स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों का सीधा मार्गदर्शन मिलता है। जैसे ही कोई पीड़ित कॉल, एसएमएस, मोबाइल ऐप या वेब पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराता है, सिस्टम में 'इवेंट' पंजीकृत हो जाता है। इसके तुरंत बाद सूचना कंप्यूटर एडेड डिस्पैच ऑफिसर से होते हुए राज्य भर में गश्त कर रहे 1,800 इमरजेंसी रिस्पांस व्हीकल्स  और मोटर साइकिल के टैब पर डिजिटल रूप से फ्लैश हो जाती है। इसके बाद पुलिस टीम चंद मिनटों में घटनास्थल पर पहुंच जाती है। आधी आबादी की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने डायल 112 के तहत विशेष प्रबंध किए हैं। महिलाओं के लिए 'सुरक्षित सफर सुविधा' की शुरुआत की गई है। इसके माध्यम से रात में या अकेले यात्रा कर रही महिलाएं अपनी यात्रा से जुड़ी जानकारी पुलिस के साथ साझा कर सकती हैं। आपात स्थिति में उन्हें तुरंत मदद दी जाती है और जरूरत पड़ने पर महिलाओं को सुरक्षित घर पहुंचाने की भी व्यवस्था की गई है। बिहार में डायल 112 बेहतरीन प्रदर्शन कर रही है और हम राष्ट्रीय स्तर पर टॉप पर हैं। वर्तमान में हमारा रिस्पांस टाइम लगभग 10 मिनट है, लेकिन मुख्यमंत्री जी का लक्ष्य इसे 7 मिनट के करीब लाने का है। सरकार के सहयोग से जल्द ही हमें और भी नए संसाधन मिलने वाले हैं, जिससे हम अपनी पहुंच सुदूर गांवों तक पूरी तरह स्थापित कर लेंगे। इस बेहतरीन सफलता के बीच कॉल सेंटर के अधिकारियों ने एक अनोखी चुनौती का भी जिक्र किया। नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि कई बार लोग बेहद हास्यास्पद वजहों से 112 पर फोन कर देते हैं। कोई मोबाइल रिचार्ज कराने के लिए फोन करता है, तो कोई अपने पालतू कुत्ते की बीमारी की सूचना देने लगता है। कई बार लोग ट्रेन या बस का टाइम-टेबल पूछने के लिए भी आपातकालीन लाइन व्यस्त कर देते हैं। अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि वे इस संवेदनशील और जीवन रक्षक नंबर का उपयोग केवल वास्तविक आपात स्थिति में ही करें ताकि जरूरतमंदों तक मदद पहुंचने में एक सेकंड की भी देरी न हो।