देहरादून। उत्तराखंड में खाद्य पदार्थों में मिलावट और भ्रामक लेबलिंग के मामलों को लेकर विधानसभा में जोरदार चर्चा हुई। प्रश्नकाल के दौरान विधायकों ने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था, एफडीए में खाली पदों और खाद्य पदार्थों की जांच व्यवस्था पर सरकार से जवाब मांगा। सरकार ने सदन को बताया कि पिछले दो वर्षों में राज्य में लिए गए 3,311 खाद्य सैंपलों में से 330 सैंपल जांच में फेल पाए गए हैं, जिनसे जुड़े मामले फिलहाल न्यायालय में लंबित हैं। खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर विधायक बृजभूषण गैरोला ने सवाल उठाते हुए पूछा कि राज्य में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) में कई पद खाली पड़े हैं, जिससे जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि देहरादून में प्रस्तावित खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला कब तक शुरू होगी। इस पर स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत ने जवाब देते हुए बताया कि राज्य में हर साल नियमित रूप से खाद्य सैंपलों की जांच की जाती है। पिछले दो वर्षों में कुल 3,311 सैंपल लिए गए, जिनमें से 330 सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे। इन सभी मामलों में कानूनी कार्रवाई की गई है और संबंधित वाद न्यायालय में विचाराधीन हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि देहरादून में आधुनिक सुविधाओं से लैस खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है और इसका उद्घाटन 31 मार्च 2026 से पहले कर दिया जाएगा। इस लैब के शुरू होने से राज्य में खाद्य पदार्थों की जांच प्रक्रिया और अधिक तेज और प्रभावी हो सकेगी। सदन में ऑनलाइन खाद्य पदार्थों की बिक्री और उनकी गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए गए। विधायक प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि खाद्य पदार्थों की जांच अक्सर केवल त्योहारों से पहले ही सक्रिय रूप से की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई ज्यादातर छोटे व्यापारियों के खिलाफ होती है, जबकि बड़े मॉल और सुपरमार्केट में जांच कम देखने को मिलती है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि ऑनलाइन फूड डिलीवरी और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बढ़ते चलन के बीच स्वास्थ्य विभाग उनकी निगरानी के लिए क्या कदम उठा रहा है। इस पर मंत्री धन सिंह रावत ने आश्वासन दिया कि जहां-जहां सदस्य सुझाव देंगे, वहां कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ने पर अगले ही दिन से जांच अभियान शुरू किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि कैंसर को नोटिफाई करने के लिए जल्द ही नई गाइडलाइन जारी की जाएगी और इस गंभीर बीमारी से निपटने के लिए नीति स्तर पर बड़े कदम उठाए जाएंगे। विधायक विनोद चमोली ने चर्चा के दौरान कहा कि पहले स्थानीय निकाय भी खाद्य पदार्थों की जांच और मिलावट के खिलाफ कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। उनके पास इसके लिए पर्याप्त तंत्र मौजूद था, लेकिन बाद में यह जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग को सौंप दी गई। उन्होंने सुझाव दिया कि स्थानीय निकायों को फिर से इस कार्य में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि मिलावटखोरी पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके। स्वास्थ्य मंत्री ने इस सुझाव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार करेगी। सदन में हुई चर्चा से स्पष्ट है कि राज्य में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है, ताकि मिलावटी और असुरक्षित खाद्य पदार्थों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके और आम जनता के स्वास्थ्य की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

