बरसात में भू-स्खलन से ध्वस्त हुऐ राजकीय पालीटेक्निक गौचर के प्रांगण का नौ महीने बाद भी जिला प्रशासन ने सुध नहीं ली

Blog
 Image

गौचर / चमोली।

ललिता प्रसाद लखेड़ा 
बरसात में भू-स्खलन से ध्वस्त हुऐ राजकीय पालीटेक्निक गौचर के प्रांगण का नौ महीने बाद भी जिला प्रशासन ने सुध नहीं ली


             बरसात के मौसम में भू-स्खलन होने से ध्वस्त हुऐ राजकीय पालीटेक्निक गौचर के प्रांगण की सुरक्षा संवंधी सुधारीकरण कार्य नौ माह बीतने पर भी नहीं किये जाने पर अभिभावकों व छात्र छात्राओं में शासन प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी बनी हुई है। जबकि विद्यालय प्रशासन द्वारा इस संबंध में जिलाधिकारी को पूर्व में ज्ञापन भी दिया गया है।


             आने वाले  बरसात के मौसम की चिंता यहां अभी से छात्र छात्राओं व शिक्षकों में बनी हुई है। बरसात से पहले विद्यालय प्रांगण के ध्वस्त हुऐ दिवाल को शीघ्र नहीं बनाया गया तो आने वाले समय में पूरे विद्यालय भवन को खतरा हो सकता है। जिसे लेकर छात्र शिक्षक व अभिभावकों में भारी डर व चिन्ता बनी हुई है।
  अभिभावकों ने जनपद चमोली के सबसे पुराने पालीटेक्निक की उपेक्षा पर नाराजगी व्यक्त करते हुऐ विगत वर्ष अगस्त में भारी बरसात के दौरान विद्यालय का प्रांगण भू-स्खलन की चपेट में आ गया था। जिससे 400 से अधिक छात्र छात्राओं वाले इस विद्यालय भवन को खतरा पैदा होने से डर का माहौल बना रहा। विद्यालय प्रशासन द्वारा शासन प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन नौ माह का अरसा बीत जाने पर भी अभी तक क्षतिग्रस्त प्रांगण के सुधारीकरण हेतु सुरक्षात्मक कार्य शुरू नहीं हुआ है। जिससे अभिभावकों में भी शासन प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी बनी हुई है।   
  अभिभावकों ने ज़िला प्रशासन का ध्यान इस ओर दिलाते  हुऐ कहा कि बरसात से पूर्व सुरक्षात्मक कार्य नही कराये गये तो अनहोनी होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। विद्यालय के प्रधानाचार्य राजकुमार जी ने बताया कि इस संवंध में जिलाधिकारी चमोली को पूर्व में ज्ञापन देकर अवगत कराया गया है। नगरपालिका गौचर के पूर्व अध्यक्ष एवं कांग्रेस पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश नेगी ने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान खुले जनपद के सबसे पुराने पालीटेक्निक गौचर की शासन प्रशासन के स्तर पर भारी उपेक्षा की जा रही है जो ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि इच्छा शक्ति हो तो इस कार्य को तो क्षेत्रीय विधायक अपनी विधायक निधि से भी करवा सकते हैं। उन्होंने कहा कि 1979 के दशक में डाक्टर शिवानंद नौटियाल ने उत्तर प्रदेश राज्य के शासनकाल में रहते हुए चमोली जनपद के गौचर में इसकी नींव रखी थी जिसकी वर्तमान समय में सरकार द्वारा घोर उपेक्षा की जा रही है।