कूड़े से चमकी जसपुर की पेपर मिल! यूपीसीएल को तगड़ा झटका, विद्युत नियामक आयोग ने दी बड़ी राहत

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देहरादून। राज्य में हरित ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाने वाले उद्योगों के लिए उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने एक नज़ीर पेश करने वाला बड़ा फैसला सुनाया है। ऊधम सिंह नगर जिले के जसपुर में स्थित विश्वनाथ पेपर मिल अब कूड़े (वेस्ट) से बिजली बनाकर पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने जा रही है। मिल द्वारा ग्रिड पर निर्भरता खत्म करने के बाद बिजली बिल और लोड घटाने में अड़ंगा डाल रहे उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) को आयोग से करारा झटका लगा है। आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि खुद का पावर प्लांट लगाने वाले उद्योगों पर पुराने निगरानी नियम नहीं थोपे जा सकते।

कूड़े से बिजली बनाकर आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ी जसपुर की विश्वनाथ पेपर मिल को उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग से बड़ी राहत मिली है। अपने परिसर में अपशिष्ट से बिजली बनाने का संयंत्र स्थापित करने के बावजूद कंपनी को अनुबंधित विद्युत भार कम करने की अनुमति नहीं दे रहे उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) के रुख को आयोग ने अनुचित ठहराया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि हरित ऊर्जा अपनाने वाले उपभोक्ताओं पर पुराने नियमों को यांत्रिक तरीके से लागू नहीं किया जा सकता। साथ ही यूपीसीएल को कंपनी का अनुबंधित भार घटाने, पुराने निश्चित शुल्क का समायोजन करने और अतिरिक्त सुरक्षा राशि लौटाने के निर्देश दिए हैं। ऊधम सिंह नगर जिले के जसपुर स्थित विश्वनाथ पेपर मिल हर महीने बिजली ग्रिड से लगभग 25 लाख यूनिट बिजली लेती थी। बिजली पर निर्भरता कम करने और अपशिष्ट का उपयोग करने के उद्देश्य से कंपनी ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के अपशिष्ट से ऊर्जा बनाने के कार्यक्रम के तहत अपने परिसर में 40 टीपीएच क्षमता का बॉयलर और छह मेगावाट क्षमता का टर्बो-जनरेटर संयंत्र स्थापित किया। संयंत्र चालू होने के बाद कंपनी की ग्रिड से बिजली लेने की जरूरत लगभग समाप्त हो गई। उसकी मासिक खपत करीब 25 लाख यूनिट से घटकर महज 31 हजार यूनिट के आसपास रह गई। अपने बिजली उपभोग में भारी कमी को देखते हुए कंपनी ने आठ सितंबर 2025 को यूपीसीएल को पत्र भेजकर अनुबंधित भार 4700 किलोवाट से घटाकर 1250 किलोवाट करने का अनुरोध किया था। हालांकि, यूपीसीएल ने आपूर्ति संहिता के नियम 4.1.1(12) का हवाला देते हुए इस मांग को स्वीकार नहीं किया। यूपीसीएल का तर्क था कि अनुबंधित भार कम करने के लिए आवेदन से पहले के चार महीनों में वास्तविक बिजली खपत कम होना आवश्यक है। कंपनी का कहना था कि उसने स्थायी रूप से अपना बिजली उत्पादन संयंत्र स्थापित कर लिया है और ऐसे में पुराने उपभोग के आधार पर भार कम करने से इनकार करना उचित नहीं है। राहत नहीं मिलने पर कंपनी ने विद्युत नियामक आयोग का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य विधि अनुराग शर्मा और सदस्य तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी की पीठ ने की। पीठ ने यूपीसीएल के तर्क को इस मामले में अनुचित माना। आयोग के अनुसार, चार महीने तक वास्तविक खपत की निगरानी से जुड़ा प्रावधान उन परिस्थितियों में उपयोगी है, जहां उपभोक्ता बिल में राहत पाने के लिए अस्थायी रूप से खपत कम कर सकते हैं। लेकिन जिन उपभोक्ताओं ने स्थायी रूप से अपना बिजली उत्पादन संयंत्र स्थापित कर लिया है, उन्हें सामान्य उपभोक्ताओं की श्रेणी में रखकर उसी तरह नियम लागू करना उचित नहीं है। आयोग ने अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए माना कि ऐसे मामलों में दो महीने का अग्रिम नोटिस पर्याप्त है। आयोग ने यूपीसीएल को विश्वनाथ पेपर मिल का अनुबंधित भार 4700 किलोवाट से घटाकर 1250 किलोवाट करने का निर्देश दिया। यह बदलाव आठ नवंबर 2025 से प्रभावी माना जाएगा। इसके साथ ही पिछली अवधि में वसूले गए निश्चित शुल्क का समायोजन भी करना होगा। सबसे अहम निर्देश कंपनी की ओर से जमा करीब 2.48 करोड़ रुपये की सुरक्षा राशि को लेकर है। आयोग ने यूपीसीएल को नए अनुबंधित भार के आधार पर इस राशि का पुनर्मूल्यांकन करने और अतिरिक्त रकम 15 दिनों के भीतर लौटाने को कहा है। इस फैसले से विश्वनाथ पेपर मिल को आर्थिक राहत मिलने के साथ ही अपशिष्ट से बिजली उत्पादन को बढ़ावा देने का रास्ता भी मजबूत हो सकता है। साथ ही यह मामला उन औद्योगिक इकाइयों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो अपनी बिजली जरूरतें पूरी करने के लिए वैकल्पिक और हरित ऊर्जा स्रोत अपना रही हैं।