डॉ. मुखर्जी के सपनों को मोदी सरकार ने किया साकार, बलिदान दिवस पर बोले सीएम सम्राट चौधरी

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पटना। भारतीय जनसंघ के संस्थापक, मां भारती के अनन्य उपासक और प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर सोमवार को बिहार की राजधानी पटना में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। भाजपा प्रदेश कार्यालय स्थित अटल सभागार में आयोजित एक विशेष गरिमामयी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत बिहार सरकार के मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं ने डॉ. मुखर्जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर देश की एकता के लिए उनके द्वारा दिए गए सर्वोच्च बलिदान को याद किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के महान जीवन, त्याग, संघर्ष और अद्वितीय राष्ट्रभक्ति पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने अखंड भारत और राष्ट्रीय एकता के संकल्प को लेकर अपना सम्पूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा में समर्पित कर दिया था, जिसे देश कभी नहीं भूल सकता। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के ऐतिहासिक संकल्पों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का स्पष्ट मानना था कि एक ही संप्रभु राष्ट्र के भीतर दो तरह की व्यवस्थाएं नहीं रह सकतीं। "डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने नारा दिया था कि 'एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे।' आज देश को गर्व है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत नेतृत्व में उनकी इस दूरदर्शी सोच और संकल्प को धरातल पर उतारा जा चुका है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A की ऐतिहासिक समाप्ति 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' की अवधारणा को सशक्त करने और डॉ. मुखर्जी के सपनों को पूरा करने की दिशा में उठाया गया सबसे बड़ा कदम है। बिहार सरकार के मंत्री एवं भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिलीप जायसवाल ने भी डॉ. मुखर्जी के बहुआयामी व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि एक महान शिक्षाविद् और दूरदर्शी चिंतक थे, जिन्होंने हमेशा राष्ट्रहित को राजनीति से ऊपर रखा। उन्होंने याद दिलाया कि डॉ. मुखर्जी ने बहुत ही कम उम्र में कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति (Vice-Chancellor) के रूप में अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय दिया था। स्वतंत्र भारत के शुरुआती दिनों में भी जब राष्ट्रीय हितों और देश की संप्रभुता से जुड़े मुद्दे आए, तो उन्होंने हमेशा स्पष्ट और दृढ़ राय रखी। जम्मू-कश्मीर के पूर्ण एकीकरण के लिए दिया गया उनका सर्वोच्च बलिदान हर भारतवासी को सदैव राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष हरिभूषण ठाकुर बचौल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अलग प्रधान और अलग निशान के विरोध में डॉ. मुखर्जी का संघर्ष इतिहास में त्याग का अनुपम उदाहरण है। उनका यह संघर्ष राष्ट्रीय एकीकरण के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। आज के समय में आवश्यकता इस बात की है कि देश की युवा पीढ़ी उनके आदर्शों, राष्ट्रसेवा की भावना और कर्तव्यनिष्ठा को अपने जीवन में उतारे। कार्यक्रम में पार्टी के कई अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों, प्रदेश कार्यसमिति के सदस्यों और भारी संख्या में उपस्थित कार्यकर्ताओं ने भी डॉ. मुखर्जी के बताए मार्ग पर चलने का सामूहिक संकल्प लिया।