पटना। राजधानी पटना के गांधी मैदान स्थित कारगिल चौक पर आयोजित ‘जन आक्रोश महिला सम्मेलन’ में सोमवार को बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया। इस सम्मेलन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शामिल हुए और महिलाओं के अधिकार, मान-सम्मान और स्वाभिमान के मुद्दे पर एनडीए की एकजुटता का संदेश दिया। कार्यक्रम का आयोजन नारी शक्ति वंदन अधिनियम यानी 33 प्रतिशत महिला आरक्षण के समर्थन और विपक्षी दलों के विरोध के खिलाफ किया गया था।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि हजारों की संख्या में महिलाओं की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि अब महिलाएं अपने अधिकारों के लिए जागरूक और संगठित हो चुकी हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है और यह लक्ष्य पूरा करके ही दम लेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए संविधान संशोधन विधेयकों में नारी शक्ति वंदन अधिनियम, परिसीमन विधेयक और केंद्रशासित प्रदेश कानून संशोधन शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं को आरक्षण वर्तमान आबादी के आधार पर देने की योजना है। अनुमान के अनुसार, यदि परिसीमन के बाद 2029-30 में चुनाव होते हैं, तो बिहार विधानसभा में महिलाओं की संख्या 29 से बढ़कर कम से कम 122 तक पहुंच सकती है, जो राज्य की राजनीति में एक बड़ा बदलाव होगा। सीएम ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस और राजद जैसी पार्टियों ने महिला आरक्षण का विरोध कर महिलाओं के साथ अन्याय किया है। उनका आरोप था कि विपक्षी दल नहीं चाहते कि आम परिवारों की महिलाएं आगे बढ़ें, बल्कि वे केवल अपने परिवार की महिलाओं को ही राजनीतिक अवसर देना चाहते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कई नेताओं के परिवारों का जिक्र किया और कहा कि यह राजनीति परिवारवाद तक सीमित है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि एनडीए सरकार ने ही बिहार में पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देकर उन्हें सशक्त बनाया है। इसका परिणाम यह है कि आज राज्य में 59 प्रतिशत से अधिक महिला जनप्रतिनिधि चुनी जा चुकी हैं। इसके अलावा जीविका स्वयं सहायता समूहों के जरिए करोड़ों महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का काम किया गया है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने महिलाओं की सुरक्षा पर भी जोर दिया और कहा कि यदि किसी ने महिलाओं की सुरक्षा में बाधा डालने की कोशिश की, तो उसे किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सम्मेलन के अंत में मुख्यमंत्री ने महिलाओं से आह्वान किया कि वे इस आंदोलन को प्रखंड और जिला स्तर तक ले जाएं और अधिक से अधिक महिलाओं को इसके प्रति जागरूक करें। उन्होंने कहा कि इस जन आक्रोश को तब तक जिंदा रखना होगा, जब तक लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण नहीं मिल जाता। इस सम्मेलन के जरिए एनडीए ने स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की कि वह महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई में पूरी मजबूती के साथ खड़ा है और आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीति के केंद्र में बना रहेगा।

