देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देहरादून दौरे के दौरान दिए गए 'स्वच्छ देवभूमि' के संदेश को अब धरातल पर उतारने की तैयारी पूरी हो गई है। आगामी चारधाम यात्रा को देखते हुए राज्य सरकार ने इस बार 'जीरो वेस्ट' (शून्य कचरा) और 'प्लास्टिक मुक्त यात्रा' का लक्ष्य रखा है। इसी कड़ी में उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोडल एजेंसी बनाया गया है, जिसने यात्रा मार्गों पर स्वच्छता की नई इबारत लिखने के लिए एक विस्तृत एक्शन प्लान तैयार कर लिया है।
प्रधानमंत्री के संदेश के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को दो-टूक निर्देश दिए हैं कि चारधाम यात्रा मार्ग पर स्वच्छता और कूड़ा प्रबंधन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार यात्रा के दौरान सिंगल-यूज प्लास्टिक के प्रयोग पर न केवल प्रतिबंध रहेगा, बल्कि इसे सख्ती से लागू भी किया जाएगा। सीएम के निर्देश के बाद अब पर्यटन, पुलिस, नगर निकाय और वन विभाग मिलकर एक साझा रणनीति पर काम कर रहे हैं। राज्य में हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री पहुंचते हैं। इतनी बड़ी संख्या में आने वाले यात्रियों के कारण उत्पन्न होने वाला प्लास्टिक कचरा हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बड़ी चुनौती रहा है। बोर्ड की नई योजना के तहत: यात्रा मार्गों पर सिंगल-यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। स्थानीय व्यापारियों और पर्यटकों को इको-फ्रेंडली विकल्पों (जैसे कपड़े के थैले, पत्तल और कांच/कागज के बर्तन) के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।होटल, ढाबों और रेस्टोरेंट संचालकों के लिए गाइडलाइंस जारी की गई हैं। अब धामों में नहीं कचरा दिखेगा इस बार केवल कूड़ा उठाना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि उसके वैज्ञानिक निस्तारण पर भी जोर है। यात्रा मार्गों और धामों के आसपास संग्रहण केंद्रों की संख्या काफी बढ़ाई जा रही है।सूखे और गीले कचरे को स्रोत पर ही अलग करने की व्यवस्था की गई है। नगर निकायों को अतिरिक्त संसाधन और मैनपावर उपलब्ध कराई गई है ताकि कचरा प्रबंधन की चेन कहीं न टूटे। प्रशासन का मानना है कि केवल नियम बनाने से काम नहीं चलेगा, इसके लिए यात्रियों का सहयोग जरूरी है। इसके लिए यात्रा मार्गों पर विशेष वर्कशॉप आयोजित की जाएंगी और विभिन्न संचार माध्यमों से 'स्वच्छ चारधाम-स्वस्थ चारधाम' का प्रचार किया जाएगा। हीना और दोबाटा जैसे स्क्रीनिंग पॉइंट्स पर भी यात्रियों को स्वच्छता की शपथ दिलाई जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, यदि यह अभियान सफल रहता है तो उत्तराखंड विश्व स्तर पर एक 'जिम्मेदार पर्यटन स्थल' के रूप में उभरेगा। यह न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद करेगा, बल्कि हिमालय की पवित्रता और राज्य की छवि को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

