रैपिड रेल से 40 मिनट में पटना! मुजफ्फरपुर को ₹1047 करोड़ की 982 योजनाओं की बड़ी सौगात

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मुजफ्फरपुर। बिहार के विकास को एक नई रफ्तार और आधुनिक पहचान देने के लिए उपमुख्यमंत्री सह नगर विकास एवं आवास मंत्री सम्राट चौधरी ने मुजफ्फरपुर को सौगातों की बड़ी झड़ी लगा दी है। बाबा गरीबनाथ की पावन नगरी पहुंचे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मुजफ्फरपुर के एमआईटी मैदान में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान ₹1,047.09 करोड़ की भारी-भरकम लागत वाली कुल 982 विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में उमड़े जनसैलाब को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि विकसित बिहार के बिना विकसित भारत का सपना अधूरा है। ये योजनाएं मुजफ्फरपुर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, शहरी सुविधाओं को आधुनिक बनाने और आम जनता के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने में मील का पत्थर साबित होंगी।

मंच से जनता को संबोधित करते हुए सम्राट चौधरी ने मुजफ्फरपुर वासियों के लिए सबसे बड़ी और बहुप्रतीक्षित घोषणा की। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरपुर के विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए इसे एक्सप्रेस-वे से जोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही बिहार में 'रैपिड रेल परियोजना' पर काम बेहद तेजी से आगे बढ़ रहा है। बढ़ते शहरीकरण को व्यवस्थित करने और जनता को महानगरों जैसी आधुनिक सुविधाएं देने के लिए मुख्यमंत्री ने एक और बड़ा विजन सामने रखा। उन्होंने घोषणा की कि पटना के पॉश इलाके कंकड़बाग की तर्ज पर बिहार के 12 प्रमुख जिलों में अत्याधुनिक 'सैटेलाइट सिटी' का निर्माण किया जाएगा। यह कदम बिहार के शहरी नियोजन को एक बिल्कुल नई और सुनियोजित दिशा देगा। मुजफ्फरपुर में हुए बदलावों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जिस जगह पर आज से छह साल पहले सिर्फ नाले का गंदा पानी बहता था, आज वहां आधुनिक और सुंदर विकास का स्वरूप दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में यह स्थान लाखों लोगों के आकर्षण और पर्यटन का मुख्य केंद्र बनेगा। मुख्यमंत्री ने केंद्र और राज्य सरकार के बेहतरीन तालमेल की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संयुक्त नेतृत्व में बिहार में विकास के पहिये बहुत तेजी से घूम रहे हैं। सरकार राज्य के समग्र विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कामकाज के ढर्रे में बड़े बदलाव का संकेत देते हुए उन्होंने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को कड़ी नसीहत भी दी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "अब पारंपरिक तरीके से केवल 12 घंटे काम करने से बिहार की तकदीर नहीं बदलेगी। अगर हमें विकास की रफ्तार को शीर्ष पर बनाए रखना है, तो हम सभी को 18-18 घंटे काम करने की कार्यशैली और मानसिकता को अपनाना होगा।"