2027 के लिए भाजपा के दृष्टि पत्र के बारे में जनता की राय बनाने में सोशल मीडिया की भूमिका का विश्लेषण

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उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी पारा चढ़ने लगा है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी कांग्रेस के बीच अब 2022 के ‘दृष्टि पत्र’ (घोषणा पत्र) को लेकर सीधी टक्कर देखने को मिल रही है। कांग्रेस जहां इसे अधूरे वादों का दस्तावेज बता रही है, वहीं बीजेपी इसे अपने विकास कार्यों का रोडमैप बताते हुए जनता के बीच जाने की तैयारी में है।

दरअसल, 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने ‘दृष्टि पत्र’ के जरिए युवाओं, किसानों, महिलाओं और बुनियादी ढांचे को लेकर कई बड़े वादे किए थे। अब जब चुनाव नजदीक हैं, तो इन्हीं वादों की समीक्षा सियासी मुद्दा बन गई है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने अपने प्रमुख वादों को जमीन पर उतारने में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं की। कांग्रेस के मुताबिक, सबसे बड़ा मुद्दा साल में तीन मुफ्त गैस सिलेंडर देने का वादा है, जो पूरी तरह लागू नहीं हो पाया। इसके अलावा युवाओं को रोजगार देने का वादा भी अधूरा बताया जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि कुछ भर्तियां जरूर निकलीं, लेकिन बेरोजगारी अब भी बड़ा मुद्दा बनी हुई है। किसानों की आय दोगुनी करने, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार तथा महिलाओं के सशक्तिकरण जैसे वादों पर भी कांग्रेस सवाल उठा रही है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता प्रतिमा सिंह ने बीजेपी के दृष्टि पत्र को ‘दृष्टि दोष’ करार देते हुए कहा कि सरकार ने जनता से किए गए वादों को पूरा नहीं किया। उन्होंने किसानों की स्थिति, गैस सिलेंडर वितरण और महिला कल्याण योजनाओं को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। वहीं दूसरी ओर बीजेपी अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को गिनाते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज कर रही है। बीजेपी का दावा है कि उसने अपने दृष्टि पत्र के कई अहम बिंदुओं को सफलतापूर्वक लागू किया है। पार्टी के अनुसार, राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में उठाए गए कदम, नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई बड़ी उपलब्धियां हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में सड़कों और कनेक्टिविटी को मजबूत करने के साथ-साथ पर्यटन और धार्मिक स्थलों के विकास को भी बीजेपी अपनी सफलता के तौर पर पेश कर रही है। प्रदेश बीजेपी प्रवक्ता कमलेश रमन का कहना है कि कांग्रेस हर मुद्दे को नकारात्मक नजरिए से देखती है, जबकि भाजपा जनता के लिए काम कर रही है और उसे जनता का लगातार समर्थन मिल रहा है। कुल मिलाकर, उत्तराखंड की राजनीति में अब ‘घोषणा पत्र बनाम हकीकत’ की बहस तेज हो गई है। दोनों दल अपने-अपने दावों के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। आने वाले समय में यह मुद्दा और गर्माएगा, क्योंकि जनता ही तय करेगी कि किसका ‘दृष्टि पत्र’ असल में कितना सफल रहा।