हल्द्वानी। देश भर में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे को लेकर विपक्ष के बढ़ते हमलों और लामबंदी के बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बड़ा बयान सामने आया है। हल्द्वानी पहुंचे मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े मामले को बेवजह राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। उन्होंने प्रशासनिक कार्यप्रणाली का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी संवैधानिक या सरकारी व्यवस्था में फैसले तय प्रक्रिया के तहत ही लिए जाते हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर देश में जारी राजनीतिक विवाद के बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि किसी भी संस्थान में कामकाज की एक निर्धारित प्रक्रिया होती है और अधिकारियों की टिप्पणियों के बाद तय प्रक्रिया के तहत सामूहिक रूप से निर्णय लिया जाता है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े विवाद को “बेवजह राजनीतिक तूल” दिए जाने की बात कही। हल्द्वानी पहुंचे मुख्यमंत्री धामी से मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर चल रहे विवाद पर सवाल किया गया था। जवाब में उन्होंने कार्यालयीन प्रक्रिया का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी भी रिपोर्ट, प्रस्ताव या फाइल पर संबंधित अधिकारी अपनी टिप्पणी दर्ज करते हैं। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उस पर निर्णय लिया जाता है। उन्होंने सचिवालय की कार्यप्रणाली का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी अधिकारी किसी फाइल या रिपोर्ट पर अपनी राय रखते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय पूरी प्रक्रिया के बाद होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी व्यवस्था में अलग-अलग स्तर पर अधिकारियों की टिप्पणियां हो सकती हैं, लेकिन निर्णय प्रक्रिया को समग्र रूप से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो निर्णय जनहित में होता है, वही अंतिम रूप से लिया जाता है। इसी संदर्भ में उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े मौजूदा विवाद को राजनीतिक रंग दिए जाने पर सवाल उठाया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी दलों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। हालिया विवाद मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और निर्वाचन आयोग की निर्णय प्रक्रिया से जुड़ी रिपोर्टों के बाद तेज हुआ है। मीडिया रिपोर्टों में चुनाव आयुक्तों की ओर से कुछ निर्णयों पर आपत्तियां दर्ज किए जाने का उल्लेख किया गया है। वहीं, निर्वाचन आयोग की ओर से कहा गया है कि अंतिम आदेशों पर तीनों सदस्यों के हस्ताक्षर हैं और आयोग की निर्णय प्रक्रिया बहुमत के सिद्धांत के तहत काम करती है। इस मुद्दे पर विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे अथवा उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहा है। उत्तराखंड में भी कांग्रेस ने शुक्रवार को इसी मुद्दे को लेकर सचिवालय कूच किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को सुभाष रोड पर रोका, जिसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने वहीं प्रदर्शन किया। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी प्रदर्शन में शामिल हुए। मुख्यमंत्री धामी से इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को लेकर भी सवाल किया गया। हरिद्वार से उनके चुनाव लड़ने की चर्चाओं के संबंध में पूछे गए सवाल पर धामी ने हरीश रावत को राज्य का सम्मानित नेता बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरीश रावत का पूरा जीवन समाज के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री के स्वस्थ रहने और दीर्घायु होने की कामना भी की। धामी की इस टिप्पणी को राजनीतिक सवाल के जवाब में सौहार्दपूर्ण प्रतिक्रिया के रूप में देखा गया। गौरतलब है कि हरीश रावत हाल में चुनाव आयोग से जुड़े कांग्रेस के प्रदर्शन में भी शामिल हुए। ऐसे में मुख्यमंत्री धामी की ओर से उनकी प्रशंसा किए जाने की टिप्पणी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी। मुख्यमंत्री के बयान के बाद एक ओर जहां सीईसी विवाद पर भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस जारी रहने के संकेत हैं, वहीं धामी ने अपने बयान में निर्णय प्रक्रिया और संस्थागत कार्यप्रणाली पर जोर दिया है। चुनाव आयोग से जुड़े विवाद के बीच उत्तराखंड में भी यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा के केंद्र में बना हुआ है।

