बेटियों के सपनों को मिली नई उड़ान: देहरादून में 39 और बालिकाएं बनीं “नंदा-सुनंदा”, डीएम सविन बंसल ने बांटे ₹12.98 लाख के चेक

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देहरादून 

 सपनों की उड़ान/खबर आपके लिए 

बेटियों के सपनों को मिली नई उड़ान: देहरादून में 39 और बालिकाएं बनीं “नंदा-सुनंदा”, डीएम सविन बंसल ने बांटे ₹12.98 लाख के चेक

 कलेक्ट्रेट सभागार में संघर्षगाथा सुन छलक पड़े सबकी आंखों से आंसू— सीएम धामी के विज़न से अब तक 175 बेटियों की शिक्षा हुई पुनर्जीवित, ₹57 लाख की मिली मदद।

राजधानी देहरादून में पारिवारिक संकट और घोर आर्थिक तंगी के कारण जिन बेटियों की पढ़ाई बीच में ही छूटने की कगार पर पहुंच गई थी, उनके जीवन के अंधियारे को दूर करने के लिए जिला प्रशासन का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट “नंदा-सुनंदा” मसीहा बनकर सामने आया है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने शनिवार को कलेक्ट्रेट के ऋषिपर्णा सभागार में आयोजित 15वें संस्करण के तहत 39 जरूरतमंद बालिकाओं को ₹12,98,000 (12.98 लाख रुपये) की छात्रवृत्ति और आर्थिक सहायता के चेक सौंपे।

 भावुक पल: माताओं और बेटियों का संघर्ष सुन रो पड़ा पूरा सभागार

कार्यक्रम के दौरान कलेक्ट्रेट का माहौल उस वक्त पूरी तरह भावुक हो गया, जब मंच पर आकर इन बहादुर बेटियों और उनकी एकल माताओं ने अपनी जीवन की आपबीती सुनाई:

पिता का साया उठा, मां ने संभाला: मदीहा बेग (BCA) और हर्षिता (BSc OTT) ने रूंधे गले से बताया कि पिता की मृत्यु के बाद उनकी माताएं सिलाई-कढ़ाई करके जैसे-तैसे घर चला रही हैं, ऐसे में कॉलेज की भारी-भरकम फीस भरना उनके लिए नामुमकिन था।

आंगनबाड़ी वर्कर की मेधावी बेटियां: एमएससी (MSc) की छात्रा अंशिका शर्मा और बीए-बीएड की छात्रा अमृता शर्मा ने बताया कि वर्ष 2020 में पिता के निधन के बाद उनकी आंगनबाड़ी कार्यकर्ती माताओं के मामूली वेतन से उच्च शिक्षा का खर्च उठाना नामुमकिन हो गया था।

नर्सिंग और ग्रेजुएशन को मिला सहारा: आंचल पुण्डीर (BSc नर्सिंग) और तनिष्का मेहर (BSc) की बाधित हो रही शिक्षा को भी जिला प्रशासन ने अपनी इस कड़क पहल से पुनर्जीवित कर दिया है। इन बेटियों की मार्मिक कहानी सुनकर सभागार में मौजूद डीएम, सीडीओ समेत तमाम अधिकारियों और कर्मचारियों की आंखें नम हो गईं।

 प्राइमरी से लेकर पोस्ट ग्रेजुएशन तक की बेटियों को मिला चेक

नंदा-सुनंदा अभियान के 15वें संस्करण में शिक्षा के हर स्तर की बेटियों को कवर किया गया है:

प्राइमरी स्कूल: 12 बालिकाएं

अपर प्राइमरी: 09 बालिकाएं

सेकेंडरी: 05 बालिकाएं

सीनियर सेकेंडरी: 07 बालिकाएं

ग्रेजुएशन (स्नातक): 05 बालिकाएं

पोस्ट ग्रेजुएशन (PG): 01 बालिका

कोई भी प्रतिभा पैसे के अभाव में पीछे नहीं छूटेगी" — डीएम सविन बंसल

चेक वितरित करते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने बेटियों का हौसला बढ़ाया और एक कड़क संदेश 

जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन मजबूत इच्छाशक्ति से हर विपरीत परिस्थिति को बदला जा सकता है। 'प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा' माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में संचालित एक बेहद संवेदनशील अभियान है। हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि देवभूमि की कोई भी होनहार बेटी आर्थिक तंगी के कारण अपनी पढ़ाई न छोड़े। यह सिर्फ पैसों की मदद नहीं है, बल्कि इन बेटियों के बुलंद हौसलों और सपनों को नई उड़ान देने का संकल्प है।"

वहीं, मुख्य विकास अधिकारी (CDO) अभिनव शाह ने भी बालिकाओं को पूरी लगन से पढ़ने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि वे आगे चलकर खुद सक्षम बनें और समाज के अन्य बेसहारा लोगों का सहारा बनें।

 अब तक 175 बेटियों की संवर चुकी है तकदीर

देहरादून जिला प्रशासन का यह अनूठा प्रोजेक्ट अब तक कुल 175 बालिकाओं की शिक्षा को नया जीवन दे चुका है, जिसके तहत अब तक कुल ₹57,00,000 (57 लाख रुपये) की सहायता राशि सीधे वितरित की जा चुकी है। इस योजना से अब तक पीएचडी (PhD), एमबीबीएस (MBBS), सिविल इंजीनियरिंग, होटल मैनेजमेंट और स्किल डेवलपमेंट जैसे बड़े कोर्स कर रही गरीब बेटियों की शिक्षा को टूटने से बचाया गया है।

इस कार्यक्रम के दौरान सीडीओ अभिनव शाह, जिला कार्यक्रम अधिकारी (बाल विकास) जितेंद्र कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट सहित विभिन्न क्षेत्रों की सीडीपीओ (CDPO) और भारी संख्या में अभिभावक मौजूद रहे।