‘जो शॉर्टकट करेगा, वह बेऊर जाएगा’, मंत्री हो या अधिकारी,भ्रष्टाचार पर सीएम सम्राट की खुली चेतावनी

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पटना। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार ने अपनी 'जीरो टॉलरेंस' नीति को और कड़ा करते हुए अपराधियों और भ्रष्ट अधिकारियों को सीधे शब्दों में सचेत किया है। गुरुवार, 2 जुलाई को पटना के ज्ञान भवन में आयोजित 'बिहार सतर्कता जागरूकता दिवस एवं बिहार सतर्कता जागरूकता सप्ताह' का गरिमामयी शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध अब तक की सबसे बड़ी और खुली चेतावनी दी। मुख्यमंत्री ने साफ लहजे में कहा कि बिहार में भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, "यहां कोई शॉर्टकट नहीं चलेगा। जो भी शॉर्टकट अपनाएगा, वह सीधा बेऊर जेल जाएगा, फिर चाहे वह कोई मंत्री हो या बड़ा अधिकारी। 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य में सुशासन को और अधिक सुदृढ़ बनाने, भ्रष्टाचार पर प्रभावी लगाम लगाने तथा त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए कई युगांतकारी और महत्वपूर्ण निर्णयों की घोषणा की। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में सतर्कता और पारदर्शिता को लेकर एक व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। उसी तर्ज पर अब बिहार के भी कोने-कोने में सतर्कता जागरूकता सप्ताह के माध्यम से सभी जिलों और विभागों में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा जन-जागरण अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार सरकार अब ‘ट्रिपल टी यानी टेक्नोलॉजी , ट्रांसपेरेंसी और ट्रस्ट के सिद्धांत पर आगे बढ़ रही है। शासन में तकनीक का उपयोग कर पारदर्शिता बढ़ाई जाएगी, जिससे जनता का भरोसा सरकार पर और मजबूत हो सके। मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक अमले को सख्त हिदायत देते हुए एक बार फिर दोहराया कि अधिकारियों के लिए 30 दिनों के भीतर जनता की हर समस्या का निपटारा करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। उन्होंने जनता को अधिकार देते हुए कहा कि यदि किसी अधिकारी ने दुर्भावनापूर्ण तरीके से या नियमों को ताक पर रखकर कोई गलत आदेश पारित किया है, तो उसके खिलाफ तुरंत शिकायत दर्ज कराई जाए। ऐसे अधिकारियों के खिलाफ न सिर्फ एक्शन लिया जाएगा, बल्कि उनके विरुद्ध एफआईआर भी दर्ज की जाएगी। भ्रष्टाचारियों के खिलाफ अब बिना किसी भेदभाव के सख्त कार्रवाई होगी। चाहे शीर्ष स्तर पर बैठा व्यक्ति हो या निचले स्तर पर, कानून सबके लिए बराबर है। भ्रष्टाचारियों की संपत्ति जब्त कर उनके परिसरों में सरकारी विद्यालय संचालित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री के इन कड़े तेवरों और बड़े संस्थागत बदलावों की घोषणा के बाद राज्य के प्रशासनिक और राजनैतिक हलकों में भारी खलबली मच गई है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि सुशासन से समझौता किसी भी कीमत पर नहीं होगा।