देहरादून में पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के सानिध्य में श्रीमद्भागवत कथा का पंचम दिवस
देहरादून
जीवन में सफलता केवल धन या प्रसिद्धि से नहीं मापी जाती, बल्कि अच्छे संस्कार, सही निर्णय और संतुलित जीवन से भी जुड़ी होती है। माता-पिता हमारे पहले गुरु होते हैं, जिन्होंने हमें जीवन जीने का सही मार्ग सिखाया है। उनके अनुभव और सीख हमारे लिए एक मार्गदर्शक दीपक की तरह होते हैं, जो कठिन परिस्थितियों में भी हमें सही दिशा दिखाते हैं। इसलिए उनकी बातों को मानना और उनका सम्मान करना सफलता की ओर बढ़ने का सबसे मजबूत आधार बनता है।

मनुष्य का जीवन उसके संग के अनुसार ढलता है। जिस प्रकार सुगंधित फूलों के पास बैठने से हमारे वस्त्रों में भी खुशबू आ जाती है, उसी प्रकार सच्चे और सद्गुणी लोगों के संग से हमारे विचार, व्यवहार और संस्कार पवित्र हो जाते हैं। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि ईमानदारी, करुणा और धैर्य ही सच्ची सफलता की कुंजी हैं।इसलिए जीवन में मित्र और मार्गदर्शक चुनते समय सावधानी आवश्यक है। सच्चे लोगों का संग हमें कठिन समय में सही मार्ग दिखाता है, हमारी गलतियों को सुधारता है और हमें लक्ष्य की ओर प्रेरित करता है।
पूतना भगवान श्रीकृष्ण को मारने के उद्देश्य से अपने स्तनों पर कालकूट विष लगाकर उन्हें दूध पिलाने के लिए आती है, किंतु भगवान ने उसका भी उद्धार कर दिया। यह दर्शाता है कि भगवान केवल अपराध नहीं देखते, बल्कि भाव को देखते हैं। जो उन्हें विष पिलाने के लिए आया, यदि उसका भी उद्धार कर सकते है तो तुम्हारा क्यों नहीं कर सकते है। जब मानव अहंकार और स्वार्थ छोड़कर भगवान की शरण में जाते हैं, तो वे अवश्य हमारा उद्धार करते हैं, हमारे पापों का नाश करते हैं और हमें जीवन के दुखों से मुक्त कर मोक्ष की ओर ले जाते हैं।
आप बिना सत्संग के बुद्धिमान तो बन सकते हैं पर विवेकमान नहीं बन सकते हैं। हमें विवेकमान होना चाहिए क्यूंकि विवेकमान व्यक्ति न किसी का बुरा करता है न किसी का बुरा होने देता है। जब तक हम अपनी संस्कृति और सनातन को नहीं समझेंगे तब तक हमारे बच्चे भी हमारी संस्कृति को नहीं समझेंगे। जो मनुष्य वेद को मानता है और वेद के उपदेश को मानता है वही सच्चा सनातनी है।
भगवान के आगे कभी भी छल, कपट या दिखावे के साथ नहीं जाना चाहिए, बल्कि सच्चे और निष्कपट मन से जाना चाहिए। ईश्वर बाहरी आडंबर नहीं देखते, वे केवल हमारे हृदय की भावना को समझते हैं। यदि मन में अहंकार, छल या स्वार्थ हो, तो भक्ति का कोई वास्तविक फल नहीं मिलता। लेकिन जब हम सच्चे मन से, श्रद्धा और प्रेम के साथ भगवान का स्मरण करते हैं, तब हमारी प्रार्थना सीधे उनके चरणों तक पहुँचती है।
विधायक प्रेमचंद अग्रवाल जी ने कथा में आकर आनंद लिया
श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन का संचालन एवं व्यवस्थापन सीमा शर्मा सुनील शर्मा संदीप रस्तोगी एवं शिल्प रास्तों के द्वारा किया जा रहा है उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक संख्या में तथा में लोग पहुंच रहे हैं यहां पर भी पहुंचे
विवाह एक अत्यंत पवित्र संस्कार है, जो केवल दो व्यक्तियों का ही नहीं बल्कि दो परिवारों का भी मिलन होता है। सनातन परंपरा में इसे भगवान की साक्षी में संपन्न किया जाने वाला शुभ कार्य माना गया है। इसलिए विवाह हमेशा गोधूलि वेला में और दिन के समय करना अधिक शुभ होता है, क्योंकि दिन में सकारात्मक ऊर्जा, प्रकाश और दिव्यता का प्रभाव अधिक रहता है।
श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन
दिनांक 27 मार्च से 02 अप्रैल 2026 तक
समय: दोप. 3:30 बजे से 6:00 बजे तक
स्थान- रेंजर्स ग्राउंड, देहरादून (उत्तराखंड)

