देहरादून। उत्तराखंड की पंचम विधानसभा का वर्ष 2026 का तीसरा सत्र इस बार ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में आयोजित होने जा रहा है। आगामी 27 अक्टूबर से शुरू होने वाले इस मॉनसून सत्र को लेकर विधानसभा सचिवालय ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। राज्यपाल की औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद सत्र के सुचारू संचालन को लेकर प्रशासनिक अमला भी पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है।
ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में 27 अक्टूबर से विधानसभा का वर्ष 2026 का तीसरा सत्र शुरू होगा। राज्यपाल की मंजूरी के बाद सत्र बुलाने की आधिकारिक घोषणा की जा चुकी है। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने पत्रकार वार्ता में सत्र की तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि अब तक 31 विधायकों की ओर से कुल 426 सवाल विधानसभा सचिवालय को प्राप्त हुए हैं। इन सवालों के जरिए प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों की समस्याओं और जनहित से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष के अनुसार, 27 अक्टूबर को सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होगी। सत्र को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए विधानसभा सचिवालय आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी करने में जुटा है। अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्यवाही के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए जरूरी तैयारियां करने के निर्देश दिए गए हैं। आगामी सत्र के लिए प्राप्त 426 सवालों में प्रदेश की विभिन्न समस्याओं, विकास कार्यों और जनहित से जुड़े विषयों को उठाया जाना है। सदन में प्रश्नों के माध्यम से विधायक संबंधित विभागों से जवाब मांग सकेंगे और अपने क्षेत्रों की समस्याओं को सरकार के सामने रख सकेंगे। सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं जैसे विषय विधानसभा में उठाए जा सकते हैं। हालांकि, सचिवालय को प्राप्त सवालों में किस विषय से जुड़े कितने प्रश्न हैं, इसका विस्तृत ब्योरा अभी सामने नहीं आया है। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने कहा कि सचिवालय का प्रयास रहेगा कि विधायकों की ओर से उठाए गए सवालों पर सरकार से समय पर जवाब मिल सके। प्रश्नों के जवाब और सदन में होने वाली चर्चा के माध्यम से जनहित के मुद्दों पर सरकार का पक्ष सामने आएगा। विधानसभा सत्र की अवधि को लेकर पूछे गए सवाल पर अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि सत्र कहां आयोजित होगा और उसकी अवधि कितनी होगी, यह तय करना सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। विधानसभा अध्यक्ष और सचिवालय की जिम्मेदारी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सदन की कार्यवाही को व्यवस्थित ढंग से संचालित करना है। सत्र अक्सर दो या तीन दिन का होने और विधायकों को पर्याप्त समय नहीं मिलने से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि उपलब्ध समय का अधिकतम उपयोग करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने भरोसा जताया कि अधिक से अधिक विधायकों को अपनी बात रखने और जनहित से जुड़े मुद्दे उठाने का अवसर देने पर ध्यान रहेगा। भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में सत्र का आयोजन राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के महत्व से भी जुड़ा है। सत्र के दौरान प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित समस्याओं और विकास के मुद्दों पर चर्चा के लिए विधायकों को अवसर मिलेगा। 426 सवालों के बीच सदन की कार्यवाही को निर्धारित समय में व्यवस्थित ढंग से चलाना विधानसभा सचिवालय के सामने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी। वहीं, सरकार की ओर से कितने सवालों के जवाब दिए जाते हैं और किन विषयों पर विस्तार से चर्चा होती है, यह सत्र की अवधि, निर्धारित कार्यसूची और सदन में उपलब्ध समय पर निर्भर करेगा। अब नजर 27 अक्टूबर से शुरू होने वाले सत्र पर रहेगी, जहां विधायकों के सवालों के माध्यम से प्रदेश की समस्याओं और सरकार के कामकाज से जुड़े मुद्दे सदन में उठाए जाएंगे।

