देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड में एक बार फिर से भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं, जिससे एक बार फिर स्थानीय लोगों में डर और सतर्कता का माहौल बन गया है। ताजा मामला कुमाऊं मंडल के बागेश्वर जिले का है, जहां बुधवार शाम को धरती अचानक डोल उठी। हालांकि, इस झटके से किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन लगातार आ रहे भूकंप और उनकी कम गहराई ने प्रशासनिक महकमे और भू-वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है।
उत्तराखंड में भूकंप के झटके महसूस होने का सिलसिला एक बार फिर सामने आया है। कुमाऊं मंडल के बागेश्वर जिले में आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 2.8 मापी गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भूकंप का केंद्र जमीन से करीब पांच किलोमीटर की गहराई पर था। झटकों की खबर से लोगों में हलचल मच गई और कुछ लोग एहतियातन घरों से बाहर निकल आए। सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन भी सक्रिय हुआ और प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का पता लगाने के लिए तहसीलों तथा ग्रामसभाओं से जानकारी जुटाई गई। बागेश्वर में आए भूकंप से पहले 25 अक्टूबर को कुमाऊं मंडल के पिथौरागढ़ जिले में भी झटके महसूस किए गए थे। वहां भूकंप की तीव्रता और गहराई के संबंध में उपलब्ध विवरण में केंद्र की गहराई करीब 11 किलोमीटर बताई गई थी। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बीच पर्वतीय क्षेत्रों में भूकंप को लेकर सतर्कता और आपदा तैयारी का महत्व फिर सामने आया है। भूकंप की तीव्रता के साथ उसकी गहराई भी उसके प्रभाव को समझने का एक महत्वपूर्ण पहलू है। सामान्य तौर पर उथले भूकंप के झटके आसपास के क्षेत्रों में अधिक महसूस हो सकते हैं, हालांकि वास्तविक नुकसान का आकलन केवल तीव्रता या गहराई के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसमें भूकंप के केंद्र से दूरी, स्थानीय भूगर्भीय परिस्थितियां, भवनों की मजबूती और आबादी जैसे कारक भी महत्वपूर्ण होते हैं। उत्तराखंड हिमालयी क्षेत्र में स्थित है, जहां भारतीय और यूरेशियाई भू-प्लेटों के बीच लगातार होने वाली हलचल के कारण भूकंपीय गतिविधियां होती रहती हैं। यही वजह है कि प्रदेश के पर्वतीय जिलों में भूकंप के जोखिम को गंभीरता से लेने और आपदा प्रबंधन की तैयारियां मजबूत रखने की आवश्यकता है। हिमालयी क्षेत्र में भविष्य में बड़े भूकंप की संभावना को लेकर वैज्ञानिक लंबे समय से अध्ययन कर रहे हैं। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों के अध्ययन के आधार पर हिमालयी पट्टी में 7.5 से 8 तीव्रता के भूकंप की संभावना संबंधी आकलन का उल्लेख किया गया है। हालांकि, ऐसे आकलन क्षेत्र के दीर्घकालिक भूकंपीय जोखिम को समझने के लिए होते हैं। इनसे किसी निश्चित तारीख, समय या स्थान पर भूकंप आने की सटीक भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। इसलिए बागेश्वर में आए 2.8 तीव्रता के भूकंप को अपने आप में किसी बड़े भूकंप का निश्चित संकेत मानना उचित नहीं होगा। इसके बावजूद लगातार भूकंपीय गतिविधियों पर वैज्ञानिक निगरानी और स्थानीय स्तर पर तैयारी जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, भूकंप के जोखिम को कम करने के लिए भवन निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन, पुराने भवनों की मजबूती की जांच, विद्यालयों और सरकारी कार्यालयों में नियमित अभ्यास तथा लोगों को सुरक्षित व्यवहार की जानकारी देना महत्वपूर्ण है। भूकंप के दौरान घबराकर सीढ़ियों या निकास की ओर भागने के बजाय, यदि व्यक्ति भवन के भीतर हो तो मजबूत मेज के नीचे शरण लेना और सिर-गर्दन को सुरक्षित रखना बेहतर होता है। झटके रुकने के बाद सुरक्षित रास्ते से खुले स्थान पर पहुंचना चाहिए। बागेश्वर में आए भूकंप के बाद प्रशासन की ओर से जुटाई गई जानकारी से स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल, इस घटना ने एक बार फिर याद दिलाया है कि भूकंप की सटीक भविष्यवाणी संभव नहीं होने के बावजूद जागरूकता, सुरक्षित निर्माण और समय रहते तैयारी से संभावित नुकसान को कम किया जा सकता है।

