मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर में भाजपा नेताओं को व्हाट्सएप पर धमकी देकर करोड़ों रुपये की रंगदारी मांगने वाले कथित साइबर गिरोह का पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। बिहार सरकार के पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता के बेटे और भाजपा नेता कृष्ण मुरारी से 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने चार आरोपियों की पहचान कर तीन को गिरफ्तार कर लिया है। एक अन्य आरोपी अभी फरार है, जिसकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस का मानना है कि यह गिरोह केवल मुजफ्फरपुर ही नहीं, बल्कि पटना समेत अन्य जिलों में भी जनप्रतिनिधियों और प्रभावशाली लोगों को निशाना बना चुका है। पुलिस के अनुसार, 21 से 24 जुलाई के बीच एक ही मोबाइल नंबर 8476841620 से जिले के तीन भाजपा नेताओं को व्हाट्सएप पर धमकी भरे संदेश भेजे गए। आरोपियों ने कुल दो करोड़ रुपये की रंगदारी की मांग की। लगातार एक ही नंबर से धमकियां मिलने के बाद पुलिस ने इसे संगठित साइबर रंगदारी गिरोह की साजिश मानते हुए जांच तेज कर दी।
मामले की शुरुआत तब हुई जब बिहार के पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता के पुत्र कृष्ण मुरारी ने सदर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, 24 जुलाई की रात करीब 10:20 बजे उनके व्हाट्सएप पर एक संदेश आया, जिसमें भेजने वाले ने खुद को मुंबई से संचालित एक गैंग का सदस्य बताया और 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगी। संदेश में रकम नहीं देने पर जान से मारने की धमकी भी दी गई थी। इसके बाद कृष्ण मुरारी ने पुलिस से सुरक्षा और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि इसी मोबाइल नंबर से ब्रह्मपुरा निवासी भाजपा नेता रंजीत सहनी से 21 जुलाई को 50 लाख रुपये, साहेबगंज के जिला पार्षद एवं भाजपा नेता इंजीनियर राजेश सहनी से 24 जुलाई को एक करोड़ रुपये और उसी दिन पर्यटन मंत्री के पुत्र कृष्ण मुरारी से 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई थी। तीनों मामलों में एक ही नंबर के इस्तेमाल ने पुलिस को गिरोह तक पहुंचने में महत्वपूर्ण सुराग दिया। मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कांतेश कुमार मिश्रा के निर्देश पर गठित एसआईटी ने तकनीकी जांच और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर चार संदिग्धों की पहचान की। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कुढ़नी थाना क्षेत्र के किशुनपुर बलौर निवासी अमन प्रकाश, जो जिला परिवहन कार्यालय में संविदा कर्मी है, ब्रह्मपुरा निवासी पवन सहनी तथा कांटी निवासी कन्हाई कुमार को गिरफ्तार कर लिया। चौथे आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि यही गिरोह पटना में भी एक विधायक, एक डॉक्टर और अन्य जनप्रतिनिधियों को इसी तरह व्हाट्सएप के जरिए धमकी देकर रंगदारी मांग चुका है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क, इसके तकनीकी लिंक और संभावित अन्य सदस्यों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, कृष्ण मुरारी को वर्ष 2025 में विधानसभा चुनाव से पहले भी 10 लाख रुपये की रंगदारी मांगते हुए धमकी मिली थी। उस समय भी मामला दर्ज हुआ था, लेकिन पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी। इस बार पुलिस तकनीकी जांच के जरिए पूरे गिरोह तक पहुंचने का दावा कर रही है। एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने बताया कि तीनों मामलों में एफआईआर दर्ज कर एसआईटी का गठन किया गया था। जांच के दौरान गिरोह के कुछ सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया है और पूरे नेटवर्क की पड़ताल जारी है। उन्होंने कहा कि फरार आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर मामले का विस्तृत खुलासा किया जाएगा। पुलिस की इस कार्रवाई को संगठित साइबर रंगदारी गिरोहों के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है। साथ ही यह भी संकेत मिला है कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए अपराध करने वाले गिरोहों पर अब पुलिस की निगरानी और कार्रवाई पहले से अधिक तेज हो गई है।

