पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और उसके कारण ऊर्जा संसाधनों पर पड़ रहे दबाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का असर अब देवभूमि उत्तराखंड में धरातल पर दिखने लगा है। प्रधानमंत्री द्वारा देश की विदेशी मुद्रा को बचाने और पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के आह्वान पर अमल करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी 'वीआईपी फ्लीट' (काफिले) में बड़ी कटौती कर सादगी और सतर्कता का संदेश दिया है।
सचिवालय में बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक के दौरान एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के काफिले में पहले सुरक्षा वाहनों के साथ कुल 9 गाड़ियां चलती थीं, लेकिन अब इसे घटाकर मात्र 5 कर दिया गया है। मुख्यमंत्री का यह निर्णय सीधे तौर पर प्रधानमंत्री की उस अपील से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने देशवासियों से ऊर्जा संसाधनों का सीमित इस्तेमाल करने को कहा था। कैबिनेट बैठक में केवल मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि उनके मंत्री भी बदलाव के रंग में रंगे नजर आए। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी अपनी सरकारी लग्जरी कार छोड़ इलेक्ट्रिक स्कूटी पर सवार होकर सचिवालय पहुंचे। वहीं, भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल भी इसी सादगी भरे अंदाज में दिखाई दिए। मंत्रियों का यह कदम चर्चा का केंद्र बना रहा और लोगों ने इसे पर्यावरण व ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक सकारात्मक पहल बताया। दरअसल, हैदराबाद की एक रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया संकट के कारण सप्लाई चेन में आ रही बाधाओं और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई थी। पीएम ने देशवासियों को अगले एक साल तक पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, कारपूलिंग करने, इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ाने और अनावश्यक सोने की खरीद व विदेश यात्राओं को टालने का सुझाव दिया था। उत्तराखंड सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम न केवल सरकारी खर्च में कटौती करेगा, बल्कि आम जनता को भी कारपूलिंग और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग के लिए प्रेरित करेगा। मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया है कि संकट के समय में संसाधनों का विवेकपूर्ण इस्तेमाल हर नागरिक का कर्तव्य है। सचिवालय में मंत्रियों की इस 'स्कूटी सवारी' और मुख्यमंत्री के छोटे काफिले ने यह साबित कर दिया है कि जब बात राष्ट्रहित की हो, तो उत्तराखंड के 'माननीय' सबसे आगे खड़े हैं।

