उत्तराखंड में डिजिटल जनगणना की राह होगी आसान: मास्टर ट्रेनर्स ने सीखीं मैदानी चुनौतियां, 4 दिवसीय गहन प्रशिक्षण संपन्न

Blog
 Image

देहरादून। देश के सबसे महत्वपूर्ण और वृहद प्रशासनिक अभियानों में से एक 'राष्ट्रीय जनसंख्या गणना' के दूसरे चरण को उत्तराखंड में पूरी पारदर्शिता, शुद्धता और सुचारू रूप से लागू करने के लिए तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। देहरादून स्थित प्रतिष्ठित वन अनुसंधान संस्थान के साइंटिस्ट्स हॉस्टल में जनगणना निदेशालय द्वारा आयोजित मास्टर ट्रेनर्स का चार दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम बृहस्पतिवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया।

जनगणना के दूसरे चरण को सफल, व्यवस्थित और त्रुटिरहित ढंग से संपन्न कराने के लिए उत्तराखंड में तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इसी क्रम में जनगणना निदेशालय की ओर से मास्टर ट्रेनर्स के लिए आयोजित चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम बुधवार को संपन्न हो गया। पांच से आठ अक्टूबर तक वन अनुसंधान संस्थान स्थित साइंटिस्ट्स हॉस्टल में चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को जनगणना की कार्यप्रणाली के साथ मैदानी स्तर पर आने वाली संभावित चुनौतियों से निपटने की व्यावहारिक जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के अंतिम दिन आयोजित फील्ड विजिट कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा रहा। इसके माध्यम से मास्टर ट्रेनर्स को वास्तविक परिस्थितियों में जनगणना कार्य की प्रक्रिया समझने और अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने की चुनौतियों का आकलन करने का अवसर मिला। प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त जानकारी का उद्देश्य आगामी चरणों में गणना कार्मिकों को बेहतर तरीके से प्रशिक्षित करना और जनगणना कार्य में एकरूपता बनाए रखना है। प्रशिक्षण के अंतिम दिन मास्टर ट्रेनर्स को मैदानी भ्रमण कराया गया। इस दौरान उन्होंने जनसंख्या गणना की कार्यप्रणाली, विभिन्न परिस्थितियों में कार्य संपादन और क्षेत्रीय स्तर पर सामने आने वाली संभावित समस्याओं को समझा। जनगणना जैसे व्यापक कार्य में प्रत्येक स्तर पर निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करना महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में व्यावहारिक प्रशिक्षण से प्रशिक्षकों को वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप तैयारी करने में मदद मिलती है। फील्ड विजिट के बाद विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों के अनुभव और सुझाव साझा किए गए। इस दौरान उनकी शंकाओं का समाधान भी किया गया। प्रशिक्षण के इस हिस्से का उद्देश्य कार्य के दौरान संभावित भ्रम को दूर करना और गणना प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए जरूरी पहलुओं पर स्पष्टता लाना रहा। समापन सत्र में निदेशक जनगणना इवा आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि जनगणना के दूसरे चरण के सफल संचालन में मास्टर ट्रेनर्स की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान का उपयोग आगामी चरणों में गणना कार्मिकों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देने में करने का आह्वान किया। उन्होंने आंकड़ों की शुद्धता, एकरूपता और निर्धारित नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया। जनगणना के आंकड़े विभिन्न योजनाओं, नीतिगत निर्णयों और विकास संबंधी जरूरतों के आकलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए आंकड़ों का सही संकलन और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन इस पूरी कवायद का अहम हिस्सा है। कार्यक्रम के समापन पर निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव और संयुक्त निदेशक एवं राष्ट्रीय प्रशिक्षक शैलेंद्र सिंह नेगी ने सभी मास्टर ट्रेनर्स को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर प्रतिभागियों ने पूरी निष्ठा, जिम्मेदारी और आपसी समन्वय के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का संकल्प लिया। चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के पूरा होने के साथ अब मास्टर ट्रेनर्स से अपेक्षा है कि वे प्राप्त जानकारी को आगे गणना कार्मिकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाएं। इससे जनगणना के दूसरे चरण में कार्यप्रणाली की एकरूपता बनाए रखने, संभावित मैदानी समस्याओं को समझने और आंकड़ों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।