उत्तराखंड में अब साल में सिर्फ दो महीने होगी सड़क की खोदाई! जनवरी-दिसंबर में ही मिलेगी अनुमति

Blog
 Image

देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड में सड़कों के निर्माण के तुरंत बाद सीवर, पानी, बिजली या केबल बिछाने के नाम पर बार-बार होने वाली अनियंत्रित खोदाई पर अब स्थायी ब्रेक लगने जा रहा है। लोक निर्माण विभाग ने राज्य के लिए एक सख्त और पारदर्शी ‘सड़क कटान नीति’ तैयार की है। इस नई नीति के लागू होने के बाद अब राज्य में कोई भी विभाग अपनी मर्जी से सड़कें खोदकर बदहाल स्थिति में नहीं छोड़ सकेगा।

अब सरकारी विभागों के लिए सड़क खोदकर उसे लंबे समय तक बदहाल छोड़ना आसान नहीं होगा। उत्तराखंड में बार-बार सड़क खोदने, अधूरी मरम्मत और गड्ढों से परेशान लोगों को राहत देने के लिए लोक निर्माण विभाग ने नई सड़क कटान नीति तैयार की है। प्रस्तावित नीति के तहत सामान्य परिस्थितियों में साल में केवल जनवरी और दिसंबर के दौरान ही सड़क खोदने की अनुमति देने का प्रावधान किया गया है। विशेष परिस्थितियों में जिलाधिकारी की मंजूरी जरूरी होगी। नीति का प्रस्ताव राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा। नई व्यवस्था लागू होने पर सीवर, पेयजल, बिजली, गैस और दूरसंचार से जुड़े कार्यों के लिए सड़क काटने वाले विभागों और निर्माण एजेंसियों को तय नियमों का पालन करना होगा। इसका प्रमुख उद्देश्य सड़क कटान के बाद उसकी गुणवत्ता बनाए रखना और निर्धारित समय में सड़क को पहले जैसी स्थिति में बहाल कराना है। प्रस्तावित नीति के अनुसार, पांच किलोमीटर से अधिक लंबी सड़क पर कटान के लिए लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता से अनुमति लेनी होगी। संबंधित विभाग को सड़क खोदने से पहले निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी और काम समाप्त होने के बाद सड़क को उसकी मूल स्थिति में बहाल करना होगा। सिर्फ सड़क की मरम्मत कराकर जिम्मेदारी खत्म नहीं मानी जाएगी। संबंधित विभाग या निर्माण एजेंसी को बहाली के बाद दो साल तक सड़क के रखरखाव की जिम्मेदारी भी उठानी होगी। लोक निर्माण विभाग निर्माण एजेंसी से लिखित आश्वासन के साथ बैंक गारंटी भी लेगा। यदि इस अवधि में सड़क की गुणवत्ता खराब पाई जाती है, तो बैंक गारंटी की राशि से मरम्मत कराई जा सकेगी। नई नीति में मल्टी यूटिलिटी डक्ट की व्यवस्था को भी महत्व दिया गया है। जिन स्थानों पर ऐसी डक्ट पहले से उपलब्ध होगी, वहां अलग डक्ट बिछाने के लिए दोबारा सड़क काटने की अनुमति नहीं देने का प्रस्ताव है। विशेष परिस्थितियों में इसके लिए बहुक्षेत्रीय समन्वय समिति की मंजूरी जरूरी होगी। इससे एक ही सड़क को अलग-अलग विभागों द्वारा बार-बार खोदने की समस्या पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है। प्रस्तावित नीति में विभिन्न सेवाओं से जुड़े कार्यों के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई है। सीवर लाइन बिछाने के लिए 100 मीटर की दूरी पर गहराई के अनुसार 10 से 20 दिन तक का समय तय किया गया है। पेयजल पाइपलाइन के मामले में 100 मीटर कार्य के लिए पाइप के व्यास के अनुसार 8 से 25 दिन तक की अवधि निर्धारित की गई है। बिजली नेटवर्क के काम में पाइप बिछाने के लिए सात दिन, केबल बिछाने के लिए आठ दिन और पैनल व टर्मिनेशन के लिए 15 दिन का समय प्रस्तावित है। उपभोक्ता पाइप और केबल संबंधी कार्यों के लिए भी 15 दिन की अवधि रखी गई है। वहीं, 100 मीटर ऑप्टिकल फाइबर बिछाने के लिए छह घंटे से एक दिन तक और 100 मीटर गैस पाइपलाइन के लिए नौ से दस दिन की समय-सीमा निर्धारित की गई है। लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता राजेश शर्मा के अनुसार, प्रस्तावित नीति का मुख्य उद्देश्य सड़क कटान के बाद उसकी गुणवत्ता और समय पर बहाली सुनिश्चित करना है। इससे बार-बार खुदाई करने और मरम्मत के बाद सड़क को बदहाल छोड़ने की समस्या पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। हालांकि, नीति अभी प्रस्तावित है और इसे मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलना बाकी है। मंजूरी और लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि नियमों का पालन किस तरह कराया जाएगा। यदि व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो सड़क निर्माण के बाद होने वाली अनियोजित खुदाई, यातायात में बाधा और बार-बार मरम्मत की समस्या कम करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।