प्रतिभा को मिलेगा सम्मान: पदक जीतते ही सीधे सरकारी विभाग में नियुक्ति, उत्तराखंड की नई खेल व्यवस्था

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देहरादून। उत्तराखंड की देवभूमि अब 'खेल भूमि' बनने की राह पर अग्रसर है। राज्य की खेल प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करने के लिए धामी सरकार ने 'एक जिला एक खेल' नीति को धरातल पर उतार दिया है। सरकार का लक्ष्य न केवल बुनियादी ढांचे का विकास करना है, बल्कि खिलाड़ियों को आर्थिक सुरक्षा और सरकारी नौकरी का सीधा अवसर प्रदान करना भी है। राज्य के खेल इतिहास में सबसे बड़ा अध्याय हल्द्वानी में जुड़ने जा रहा है। यहाँ प्रदेश का पहला अंतरराष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय स्थापित किया जा रहा है, जिसे अंतिम मंजूरी मिल चुकी है। यह विश्वविद्यालय पर्वतीय क्षेत्रों के उन युवाओं के लिए मील का पत्थर साबित होगा, जो संसाधनों के अभाव में अपनी प्रतिभा नहीं दिखा पाते थे। अब उन्हें अपने ही राज्य में विश्व स्तरीय वैज्ञानिक प्रशिक्षण और खेल प्रबंधन की शिक्षा मिल सकेगी।

उत्तराखंड सरकार अब राज्य को खेलों के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। पर्वतीय क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने कई महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू की हैं। इसी कड़ी में ‘एक जिला एक खेल’ नीति लागू की गई है, जबकि हल्द्वानी में राज्य का पहला अंतरराष्ट्रीय स्तर का खेल विश्वविद्यालय और लोहाघाट में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज स्थापित किया जा रहा है। महिला सशक्तीकरण और खेलों को जोड़ने के उद्देश्य से लोहाघाट में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज की स्थापना की गई है। यहाँ बालिकाओं को रहने, खाने और पढ़ाई के साथ-साथ उच्च स्तरीय कोचिंग दी जा रही है। इसका उद्देश्य राज्य की बेटियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना है। खिलाड़ियों की सबसे बड़ी चिंता उनके भविष्य और आर्थिक स्थिति को लेकर होती है। सरकार ने इसके लिए दो क्रांतिकारी कदम उठाए हैं। 14 से 23 वर्ष के प्रतिभावान खिलाड़ियों को मासिक छात्रवृत्ति के साथ-साथ महंगे खेल उपकरण खरीदने के लिए एकमुश्त आर्थिक सहायता दी जा रही है। पदक विजेता खिलाड़ियों के लिए 'आउट ऑफ टर्न' नियुक्ति की व्यवस्था की गई है। अब अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय पदक जीतने पर खिलाड़ियों को बिना किसी लंबी भर्ती प्रक्रिया के सीधे सरकारी सेवाओं में उच्च पदों पर नौकरी मिल रही है। 'एक जिला एक खेल' नीति के तहत सभी 13 जनपदों में उनकी भौगोलिक परिस्थिति और रुचि के अनुसार एक विशिष्ट खेल को चिन्हित किया गया है। स्थानीय प्रतिभाओं को खोजने के लिए नई टिहरी के बौराड़ी स्टेडियम जैसे विभिन्न केंद्रों पर खेल छात्रावासों के लिए चयन ट्रायल आयोजित किए जा रहे हैं। इन छात्रावासों में खिलाड़ियों को मुफ्त कोचिंग और आधुनिक सुविधाएं दी जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशिक्षण, तकनीक और प्रोत्साहन का यह त्रिकोण उत्तराखंड को भविष्य में ओलंपिक और एशियाई खेलों के लिए 'मेडल फैक्ट्री' के रूप में स्थापित करेगा। सरकार की इन नीतियों से अब युवाओं के लिए खेल केवल शौक नहीं, बल्कि एक सुरक्षित और सम्मानजनक करियर का विकल्प बन गया है।