देहरादून। गांधी जयंती और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दोनों महान विभूतियों का भावपूर्ण स्मरण करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की है। पूर्व संध्या पर जारी अपने विशेष संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी जी के विचार और शास्त्री जी का सादगीपूर्ण जीवन आज भी समूची मानवता व देशवासियों को सही मार्ग दिखाने का कार्य कर रहे हैं।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दोनों महापुरुषों का भावपूर्ण स्मरण करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांधी जी ने सत्य, अहिंसा, प्रेम, सद्भाव और मानवता को अपने जीवन का आधार बनाया, जबकि शास्त्री जी का पूरा जीवन सादगी, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित रहा। दोनों महापुरुषों के विचार और आदर्श आज भी देशवासियों को राष्ट्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। महात्मा गांधी को नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में गांधी जी ने सत्य और अहिंसा को सबसे बड़ी शक्ति बनाया। उन्होंने समाज के हर वर्ग को साथ लेकर स्वतंत्रता आंदोलन को व्यापक जन-आंदोलन का स्वरूप दिया। गांधी जी ने देशवासियों में स्वाधीनता, स्वाभिमान और एकता की भावना को मजबूत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांधी जी का जीवन यह संदेश देता है कि दृढ़ संकल्प, सत्य और अहिंसा के रास्ते पर चलते हुए कठिन से कठिन लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। धामी ने कहा कि गांधी जी केवल स्वतंत्रता आंदोलन के नेता नहीं थे, बल्कि उनका पूरा जीवन मानवता, करुणा और सामाजिक समरसता का संदेश देता है। जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता, आपसी प्रेम, भाईचारा और समाज के कमजोर वर्गों के प्रति सम्मान गांधी जी के विचारों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से उनके सत्य, अहिंसा और स्वच्छता के संदेश को अपने जीवन में अपनाने तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि देते हुए मुख्यमंत्री ने उनके जीवन को सादगी, ईमानदारी, नैतिकता और कर्तव्य के प्रति अटूट समर्पण का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि शास्त्री जी ने अपने आचरण और कार्यशैली से साबित किया कि सादगी और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ भी देश के बड़े दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के कठिन दौर में लाल बहादुर शास्त्री ने नेतृत्व प्रदान करते हुए राष्ट्रीय आत्मविश्वास को मजबूत किया। उनके नेतृत्व और आह्वान ने देशवासियों में एकजुटता तथा राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना को बल दिया। उनका प्रसिद्ध नारा ‘जय जवान, जय किसान’ देश की सुरक्षा में सैनिकों और खाद्य आत्मनिर्भरता में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है। धामी ने कहा कि गांधी जी का सत्य और अहिंसा का संदेश तथा शास्त्री जी का राष्ट्रसेवा, सादगी और कर्तव्य का आदर्श आज भी समाज के लिए महत्वपूर्ण हैं। दोनों महापुरुषों की जयंती पर उनके विचारों को केवल स्मरण करने के बजाय उन्हें व्यवहार और सार्वजनिक जीवन में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से गांधी जी के सत्य, अहिंसा और स्वच्छता के संदेश तथा शास्त्री जी की सादगी, ईमानदारी और राष्ट्रसेवा की भावना को आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इन आदर्शों से प्रेरणा लेकर नागरिक अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करें तो राष्ट्र निर्माण में व्यापक योगदान दिया जा सकता है।

