गौचर / चमोली।
ललिता प्रसाद लखेड़ा
डायट गौचर में दो दिवसीय काउंसलिंग एंड गाइडेंस कार्यशाला का समापन*
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान चमोली, गौचर में विद्यार्थियों के सर्वांगीण उन्नयन, मानसिक संबल तथा विद्यालयों में संवेगात्मक व सकारात्मक परिवेश के सृजन हेतु दो दिवसीय 'बालसखा' अभिमुखीकरण, निर्देशन एवं परामर्श कार्यशाला का गरिमामयी आयोजन संपन्न हुआ।

कार्यशाला का समापन डायट प्राचार्य आकाश सारस्वत की प्रेरणादायी उपस्थिति में हुआ। उन्होंने अपने उद्बोधन में रेखांकित किया कि प्रत्येक विद्यार्थी में अप्रतिम क्षमताएं व विशिष्ट प्रतिभाएं अंतर्निहित होती हैं; उन्हें सही दिशा, संबल व अनुकूल मार्गदर्शन प्रदान करने हेतु शिक्षक को केवल एक मार्गदर्शक ही नहीं, अपितु एक सजग, संवेदनशील 'बालसखा' की भूमिका का निर्वहन करना होगा।
इस वृहद कार्यशाला का कुशल व सुव्यवस्थित संयोजन एवं संचालन कार्यक्रम समन्वयक राजेंद्र प्रसाद मैखुरी तथा सुश्री नीतू सूद के संयुक्त नेतृत्व में हुआ, जिसमें जनपद चमोली के सभी विकासखंडों से आए शिक्षक-शिक्षिकाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यशाला के अकादमिक एवं तकनीकी सत्रों में संदर्भदाता राजेंद्र प्रसाद मैखुरी द्वारा मनोवैज्ञानिक परामर्श के सैद्धांतिक व व्यावहारिक पक्षों पर गहन प्रकाश डाला गया। उन्होंने विद्यार्थी परामर्श के छह प्रमुख सोपानों—अभिमुखीकरण व आत्मीय संबंध स्थापना, क्षमता - सीमाओं का सूक्ष्म अवलोकन, काउंसलिंग संवाद, निदानात्मक प्रक्रिया, समुचित रिफरल तथा सतत मूल्यांकन व टर्मिनेशन—की प्रामाणिक कार्यप्रणाली से प्रतिभागियों को परिचित कराया।

इसके साथ ही संवेगात्मक संतुलन और SWOT विश्लेषण (सामर्थ्य, दुर्बलता, अवसर एवं चुनौतियां) के माध्यम से विद्यार्थियों के अंतर्मन को समझने व उनके व्यक्तित्व को निखारने के प्रभावी गुर सिखाए गए। इसी क्रम में राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा एवं बालाजी सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में 'तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान' मार्गदर्शिका के अनुपालन पर विचार-विमर्श हुआ तथा उपस्थित शिक्षकों ने अपने विद्यालयों को पूर्णतः नशामुक्त, सुरक्षित एवं स्वस्थ शैक्षणिक परिसर के रूप में विकसित करने का सामूहिक संकल्प लिया।
कार्यशाला के द्वितीय दिवस का वातावरण ड्रीम संस्था की प्रशिक्षिकाओं सुश्री शालिनी व सुश्री आरती तथा कार्यक्रम समन्वयक सुश्री नीतू सूद के सानिध्य में अत्यंत ऊर्जावान व सुरुचिपूर्ण रहा। 'क्रियात्मक व आनंददायी गतिविधियों के माध्यम से शिक्षकों ने पारस्परिक सामंजस्य, आत्म-मूल्यांकन तथा जीवन कौशलों का सजीव अभ्यास किया। अंतिम सत्र में एससीईआरटी उत्तराखंड के महत्वाकांक्षी डिजिटल पोर्टल 'जिज्ञासा' (आप पूछें, हम बताएं), विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विद्यालय स्तर पर बालसखा गतिविधियों के प्रामाणिक दस्तावेजीकरण हेतु दो पंजिकाओं (रजिस्टरों) के व्यवस्थित संधारण की दिशा-निर्देशिका साझा की गई।
कार्यशाला का समापन इस प्रेरक संदेश के साथ हुआ कि समर्पित शिक्षक अपने मार्गदर्शन और स्नेह से नौनिहालों के सपनों को साकार कर राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएं।

