सोमवती अमावस्या पर हरिद्वार में उमड़ा आस्था का सैलाब  हरकी पैड़ी पर रिकॉर्ड भीड़

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सोमवती अमावस्या पर हरिद्वार में उमड़ा आस्था का सैलाब

 हरकी पैड़ी पर रिकॉर्ड भीड़


हरिद्वार।

सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ गंगा स्नान के लिए उमड़ पड़ी। हरकी पैड़ी समेत शहर के सभी प्रमुख गंगा घाट श्रद्धालुओं से खचाखच भरे नजर आए। इस यात्रा सीजन में पहली बार इतनी बड़ी और रिकॉर्डतोड़ भीड़ देखने को मिली, जिससे शहर की यातायात व्यवस्था पर भी भारी दबाव पड़ा।
सोमवती अमावस्या, पुरुषोत्तम मास के अंतिम दिन और संक्रांति के विशेष संयोग के कारण श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर रहा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन गंगा स्नान और पूजा-अर्चना का विशेष महत्व होता है, जिससे पुण्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के चलते दूर-दराज से श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे।
हरकी पैड़ी के अलावा अन्य गंगा घाटों तथा कुंभ मेले के दौरान विकसित किए गए घाटों पर भी भारी भीड़ देखी गई। गंगा तटों पर पूरे दिन श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं और "हर-हर गंगे" के जयघोष गूंजते रहे।
भीड़ के दबाव का असर राष्ट्रीय राजमार्ग और शहर की सड़कों पर भी दिखाई दिया। कई किलोमीटर लंबा जाम लगने से वाहन रेंगते हुए चलते रहे। हालात ऐसे रहे कि अनेक श्रद्धालुओं को हरकी पैड़ी से करीब पांच किलोमीटर पहले ही अपने वाहन खड़े कर पैदल घाटों तक पहुंचना पड़ा। हालांकि पैदल चलने में कठिनाई के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था पर इसका कोई असर नहीं दिखा।
वीकेंड और स्नान पर्व के संयुक्त प्रभाव से पिछले दो दिनों से शहर में भारी भीड़ बनी हुई है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर ने स्वयं हरकी पैड़ी पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। प्रशासन ने पूरे मेला क्षेत्र को 16 जोन और 46 सेक्टरों में विभाजित कर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया है, लेकिन भीड़ के मुकाबले व्यवस्थाएं कई स्थानों पर अपर्याप्त नजर आईं।
शहर की प्रमुख पार्किंग स्थल पंतद्वीप, दीनदयाल और रोडीबेलवाला पूरी तरह भर गए हैं। होटल, धर्मशालाएं और अतिथि गृह भी लगभग फुल हो चुके हैं। यातायात को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने आंतरिक मार्गों पर वाहनों की आवाजाही सीमित कर दी है तथा अतिरिक्त वाहनों को बैरागी कैंप पार्किंग में रोका जा रहा है।
सोमवती अमावस्या के अवसर पर उमड़ी इस अभूतपूर्व भीड़ ने हरिद्वार को पूरी तरह आस्था के रंग में रंग दिया, वहीं प्रशासन के लिए भी भीड़ प्रबंधन की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी।