26 साल बाद भी सड़क का इंतजार  डुमक गांव के ग्रामीण आज भी 7 किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर

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26 साल बाद भी सड़क का इंतजार

 डुमक गांव के ग्रामीण आज भी 7 किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर
चमोली 

उत्तराखंड राज्य बने 26 साल बीत चुके हैं, लेकिन विकासखंड जोशीमठ के दूरस्थ डुमक गांव के ग्रामीण आज भी सड़क सुविधा से वंचित हैं। गांव तक सड़क नहीं पहुंचने के कारण लोगों को आज भी 7 किलोमीटर पैदल चलकर सड़क मार्ग तक पहुंचना पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, बीमारों और गर्भवती महिलाओं को उठानी पड़ रही है। गंभीर मरीजों को डंडी-कंडी के सहारे सड़क तक लाना आज भी ग्रामीणों की मजबूरी बनी हुई है।
एक ओर सरकार प्रदेश के हर गांव को सड़क से जोड़ने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड के कई दूरस्थ गांव अब भी विकास की मुख्यधारा से कटे हुए हैं। जहां सड़कें बनी भी हैं, वहां उनकी हालत बदहाल बनी हुई है।
डुमक गांव के लिए सैजी लगा मैकोट से कलगोट-डुमक तक सड़क मार्ग वर्ष 2007-08 में स्वीकृत हुआ था। विभागीय रिकॉर्ड में सड़क निर्माण कार्य पूरा दिखाया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि आज भी करीब 7 किलोमीटर सड़क का निर्माण बाकी है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर उन्होंने कई बार आंदोलन किए, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। वर्ष 2024 में ग्रामीणों ने सड़क निर्माण को लेकर बड़ा आंदोलन भी किया था। उस दौरान जिला प्रशासन ने जल्द सड़क निर्माण का भरोसा दिया, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस बनी हुई है।
डुमक ग्राम प्रधान राजेंद्र सिंह ने बताया कि विभाग ने कागजों में सड़क निर्माण पूरा दिखा दिया है, जबकि धरातल पर अभी भी 7 किलोमीटर सड़क अधूरी है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के बाद भी ग्रामीणों को केवल आश्वासन मिला और आज भी बीमार लोगों को डंडी-कंडी के सहारे सड़क तक पहुंचाना पड़ रहा है, जो सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।


"2.5 किमी सड़क ka कार्य वन विभाग की भूमि होने के कारण कुछ आपतियाँ थी कल ही वन विभाग की संयुक्त टीम के साथ निरीक्षण किया गया। रिपोर्ट आने का इन्तजार है रिपोर्ट आने के बाद सड़क  निर्माण कार्य शुरू कर दिया जायेगा। "

                               मनमोहन सिंह 
                       अधिशासी अभियंता 
                       पी एम जे एस वाई